आनंद समवशरण बांधा तालाब में युवाचार्य भगवंत श्री महेंद्र ऋषि जी एवं छत्तीसगढ़ प्रवर्तक पूज्य श्री रतन मुनि जी महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में गुरुवार को पर्यूषण पर्व का द्वितीय दिवस हर्ष और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए युवाचार्य श्री महेंद्र ऋषि जी ने कहा, सुख से जीने का सभी प्राणी का मन होता है और सभी सुख से जीना चाहते हैं। कुछ लोग खाने से तो कुछ पहनने को ही सुख समाते हैं। उन्होंने कहा, जो भौतिकवादी सुख हम चाहते हैं, वही हमारे सबसे बड़े दुख का कारण है। बाहरी सुख, क्षणिक होता है। मैं, मुझे चाहिए की प्रवृत्ति ही हमें दुखी बनाती है। जब हम किसी दूसरे की चिंता या दुख दूर करने का प्रयास करते हैं तो उसमें होने वाली सुखानुभूति मन को सुकून देती है। युवाचार्य भगवंत ने आगे कहा, कुछ खोने का डर हमेशा भक्ति में बाधक होता है। सुख बांटने से समाधान मिलता है। हम किसी को जितना सुख देते हैं, उतना ही सुख हमें भी मिलता है। युवाचार्य भगवंत ने उदाहरण देते हुए कहा, दूध में पानी मिलाने पर दूध पानी को समाहित कर लेता है, जिससे पानी, दूध के मूल्य को पहुंच जाता है। उन्होंने कहा, जहां प्रेम होता है, वहां सुख दौड़ा चला आता है। जहां हमारे भाव शुद्ध और निर्मल होते हैं, वही सभी जीवों के साथ मैत्री की भावना जीवन में हमेशा सुख पहुंचाती है।
आनंद समवशरण में गुरुवार को श्रेया बाघमार ने 30 उपवास पूणार्हुति का संकल्प पूर्ण किया। श्रमण संघ परिवार में पहली बार इतनी कम उम्र में श्रेया ने मासक्षमण तपस्या की है। युवाचार्य श्री महेंद्र ऋषि जी ने धर्म सभा में श्रेया बाघमार को पूणार्हुति का संकल्प दिलाकर मासक्षमण पूर्ण किया। बड़ी तपस्या कर लोगों के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत करने वाली श्रेया, श्रमण संघ बालिका मंडल की अध्यक्ष हैं। श्रमण संघ बालिका मंडल ने इस उपलब्धि पर श्रेया का अभिनंदन किया।
पर्यूषण पर्व के दौरान जय आनंद मधुकर रतन भवन में प्रतिदिन 24 घंटे नवकार महामंत्र का अनुष्ठान जारी है। रात में आनंद समवशरण प्रांगण में आचार्य जयमल जी महाराज के जाप की स्तुति की जाती है जिसमें बड़ी संख्या में सभी वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। प्रतिदिन जाप एवं लकी ड्रा के लाभार्थी श्री सायर देवी उत्तमचंद सार्थक भंडारी है।

