अमीर जमात-ए-इस्लामी हिंद सैय्यद सआदत अल्लाह हुसैनी के हाथों रस्म इजरा मुकम्मल
नई दिल्ली : मर्कज जमात-ए-इस्लामी हिंद में गुजिश्ता दिनों इस्लामी साहित्य ट्रस्ट के तहत शाइआ होने वाले तर्जुमा कुरआन मजीद मय मुख़्तसर हवाशी का नजर-ए-सानीशुदा हिन्दी एडीशन का इजरा अमीर जमात-ए-इस्लामी हिंद सैय्यद सआदत अल्लाह हुसैनी, शफी मदनी सेक्रेटरी मर्कजी मकतबा इस्लामी पब्लिशर्ज, वारिस हुसैन, इकबाल सेक्रेटरी शोबा दावत, मुहम्मद जावेद और इस्लामी साहित्य ट्रस्ट के डायरेक्टर नसीम अहमद गाजी फलाही के ब दस्त अमल में आया।
इस मौका पर इस्लामी साहित्य ट्रस्ट के डायरेक्टर नसीम अहमद गाजी फलाही ने तर्जुमा कुरआन मजीद की खुसुसीआत पर रोशनी डाली और बताया कि कुरआन मजीद का ये तर्जुमा खुसूसन बिरादराने वतन के पेशे नजर तैयार किया गया है। हिंदी दाँ मुस्लमान तबका भी इससे ईस्तेफादा (फायदा) हासिल कर सकता हैं। उन्होंने कहा कि इसका तर्जुमा मौलाना मुहम्मद फारूक खां ने अंजाम दिया था। इसमें नबी पाक सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की सीरत और मुख़्तसर तालीमात कुरानी इस्तिलाहात के मअनी और कुरआन-ए-मजीद पर किए जानेवाले एतराजात के जवाबात भी शामिल हैं। मौजूदा हालात में कुरआन को समझने के लिए ये तर्जुमा कुरआन इंतिहाई मुफीद है और बिरादराने वतन के तमाम गलत-फहमियों का अजाला इस से मुम्किन है। उन्होंने बताया कि कड़ी मेहनत और माहिरीन कुरआन के तआवुन से इस पर नजर-ए-सानी की गई है और ये अब तबाअत के लिए तैयार हो चुका है।
