दुर्ग। चातुर्मास की शुरुआत का अर्थ है, आपके साथ एक विशेष यात्रा की शुरूआत। अब तक ना मालूम हमने कितनी यात्रा की है, अब भीतर की यात्रा प्रारंभ करने का अवसर है। इसे ही चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास की जागृति का एक पावन अवसर है, जो हमें प्रति वर्ष चातुर्मास मे प्राप्त होता है। आज हमें धर्म, ध्यान, त्याग व तपस्या करते हुए अपने अच्छे-बुरे कर्म काटने की महति आवश्यकता है, जो धर्म की जागृति से ही संभव है। हम आज के भौतिकवादी युग में रहते हुए, कर्म करते हुए अपना जीवन यापन कर रहे हैं और अपने कर्म बांध रहे हैं। कर्म को काटने का जीवनदर्शन में तप का बहुत महत्व बताया गया है जिससे जीवन को सहज, सरल रुप से जिया जा सकता है।
ये उद्धार बांधा तालाब परिसर, आनंद संमवशरण में श्रमण संघीय युवाचार्य श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा, आज से 92 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ प्रांत में एक महान तपस्वी संत श्री देव ऋषि जी महाराज का आगमन हुआ था। आपने राजनांदगांव और रायपुर में चातुर्मास करते हुए ज्ञान, ध्यान की अलख जगाई थी। उन्हीं की पावन प्रेरणा से राजनांदगांव में देव आनंद जैन शिक्षण संस्थान की स्थापना हुई थी, जहां अनेक जैन समाज के वरिष्ठजन ने शिक्षा अर्जित की थी। पूरे छत्तीसगढ़ प्रांत में इस संस्थान की बड़ी ख्याति थी। इस विद्यालय से पढ़े छात्र आज भारत वर्ष में अलग अलग क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि युवा चार्य श्री महेंद्र इसी ऋषि सदरी साध्वी श्री सन्मति जी के सानिध्य में आनंद संवशरण में तपस्या जारी है।
12 घंटे का नवकार महामंत्र जाप प्रारंभ
श्रमण संघ के प्रचार प्रसार प्रमुख नवीन संचेती ने बताया कि प्रतिदिन प्रात: 6 बजे से संध्या 6 बजे तक जय आनंद मधुकर रतन भवन में 12 घंटे का नवकार महामंत्री प्रारंभ हो गया है। आज के नवकार महामंत्र जाप के प्रभारी प्रवीण कुमार श्री श्रीमान परिवार थे।