दुबई : कोरोना की वजह से साल 2020 और 2021 के दौरान तौंस में यहूदीयों के सबसे बड़े मजहबी इजतिमा की मंसूखी (रोक) के बाद रवां साल तौंस के जरबा जजीरे के गरीबा माबद में मजहबी सरगर्मियों का आगाज हो गया है। एएफपी के नुमाइंदे के मुताबिक गरीबा माबद में गुजिश्ता बुध को यहूदी जाइरीन का एक ग्रुप मजहबी रसूमात की अदायगी के लिए पहुंचा। इस मौके़ पर सेक्योरिटी के फूल प्रूफ इंतिजामात किए गए थे।
जाइरीन की ऐसे चेकिंग की गई जैसे हवाई अड्डों पर की जाती है और तलाशी के लिए जदीद आलात का इस्तिमाल किया गया। इस मौके़ पर यहूदी जाइरीन ने मोमबत्तियां रोशन करने, अंडों पर खाहिशात लिखने, उन्हें मंदिर के एक छोटे गार के अंदर रखने, खुश्क मेवा-जात खाने, औरबखा (इंजीर के फल से निकाला मशरूब) पीने की अपनी रसूमात अदा कीं। कुछ जाइरीन सफेद और नीले रंग से सजाई गई दीवारों के पास यादगारी तसावीर और वीडीयोज बनाते भी देखे गए। ख़्याल रहे कि 'गरीबा माबद को तौंस ही नहीं बल्कि अफ्रÞीकी खित्ते में यहूदीयों की अहम तरीन इबादत-गाह करार दिया जाता है मगर पिछले चंद बरसों में सालाना रसूमात में पाँच हजार से ज्यादा जाइरीन नहीं आए। तौंस में इस वक़्त एक हजार से जाइद यहूदी आबाद हैं और 1956 में मुल्क की आजादी से कब्ल उनकी तादाद एक लाख से ज्यादा थी। इस साल यहूदीयों की जियारत का एहतिमाम किया गया है। दूसरी तरफ तौंस की हुकूमत गुजिशता दो सीजन की कमी दूर करने की कोशिश कर रही है।