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इल्मे दीन और दुनिया, दोनों का हासिल करना जरूरी : मौलाना कासिमुद्दीन

नई दिल्ली : उम्मते मुस्लिमा के नौनिहालों को हालात के पेशे नजर दीनी तालीम के साथ असरी उलूम से आरास्ता करना जरूरी है, ताकि मैदाने अमल में नुमायां किरदार अदा कर सकें। इसी के पेशे नजर हजरत मौलाना महमूद मदनी, सदर जमीअ उलमाए हिंद, मौलाना नयाज फारूकी, सेके्रटरी जमीअ उलमाए हिंद की ईमां पर जमीअ उल्मा का ओपन स्कूल का एक वफद मुदर्रिसा इमदादिया यमुना नगर पहुंचा जहां एक प्रोग्राम जमीअ उल्मा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के बैनरतले हजरत मौलाना हकीम उद्दीन कासिमी, जनरल सेके्रटरी जमीअ उल्मा हिंद के जेरे परस्ती और हजरत मौलाना अली हसन, सदर जमई उल्मा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल की सदारत में मुदर्रिसा इमदादिया यमुना नगर के वसीअ हाल में मुनाकिद हुआ। 

मुख़्तलिफ मदारिस के जिम्मादारान और अमाइदीन के दरमयान ओपन स्कूल का तआरुफी प्रोग्राम

प्रोग्राम का आगाज कारी इकराम साहिब मुदर्रिस इमदादिया की तिलावत से हुआ, निजामत के फराइज मौलाना अब्दुल्लाह खालिद, ने अदा किया, हजरत मौलाना हकीम उद्दीन कासिमी ने इस मौका पर तालीम की एहमीयत पर खुसूसी खिताब किया। उन्होंने कहा कि इल्मे दीन और दुनिया दोनों का हासिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जमीअ उलमाए हिंद ने अपने अकाबिर के खाब को ताबीर किया है और जमई ओपन स्कूल के निजाम के जरीया मदारिस के तलबा को जदीद तालीम और सर्टीफिकट के हुसूल की अहलीयत से आरास्ता कर रही है। उन्होंने कहा कि जमई उलमाए हिंद का काम सिर्फ किसी फलाही मंसूबे को नाफिज करना नहीं बल्कि साथ ही एक फिक्र देना भी है, इसलिए इस मंसूबे और तरीका-ए-कार पर दूसरे इदारों को भी अमल करने की जरूरत है, तन्हा हम कुछ नहीं कर सकते, ये सारे काम इजतिमाई जिÞम्मेदारियों के जिÞमन हैं।


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