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खवातीन फैसला साजी के अमल में आगे आएं : शाहनवाज कासिम


उर्दू यूनीवर्सिटी में यौमे खवातीन पर सिंपोजियम, ड्रामा और मोनो एक्ट की पेशकश

खवातीन के साथ इमतियाजी सुलूक हकीकी बल्कि समाजी देन है। खवातीन को फैसला साजी में आगे आना चाहिए जिससे उनकी तरक़्की-ओ-बा इखतियारी में बेहतरी आएगी। मआशी तरक़्की के लिए खवातीन मुख़्तलिफ कारोबारी इदारे कायम कर सकती हैं जिसमें हुकूमत तेलंगाना से उनको मदद भी मिलेगी। 

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी, शोबा तालीम-ए-निस्वाँ के जेरे-ए-एहतिमाम मुनाकिदा सिंपोजियम ब अनवान ''खवातीन की इखतियारी मसाइल और हिकमत-ए-अमलीयाँ' में शाहनवाज कासिम आईपीएस-ओ-डायरेक्टर माइनारेटी वेल्फेयर हुकूमत तेलंगाना ने इन ख़्यालात का इजहार किया। जलसे की सदारत प्रोफेसर एसएम रहमत उल्लाह, वाइस चांसलर ने की। प्रोफेसर पद्मजा शाह साबिक सदर शोबा मास कम्यूनीकेशन एंड जर्नलिजम उस्मानिया यूनीवर्सिटी ने कहा कि मीडिया एक अहम कारोबारी शोबा है। उन्होंने मीडिया में जारी मनफी रुजहानात और इसके तदारुक पर रोशनी डाली और कहा कि खवातीन मीडिया में अपनी जिÞम्मेदारी निभाते हुए उसे मुस्बत सिम्त दे सकती हैं। उन्होंने कोविड के दौरान मीडिया में खवातीन की नुमाइंदगी में आई कमी को काबिल-ए-अफसोस करार दिया। प्रोफेसर एसएम रहमत अल्लाह ने जहनी इन्किलाब पर-जोर दिया और कहा कि तालीम उसका बेहतरीन जरीया है। यही हमाजिहत तरक़्की पर गामजन करती है। 

उन्होंने शाहनवाज कासिम से दरखास्त की कि वो हुकूमत तेलंगाना के जरीया यूनीवर्सिटी तलबा को मिड डे मील और ट्रांसपोर्टेशन के जरीया मदद करें ताकि बच्चों को तालीम जारी रखने में आसानी हो। 

खवातीन को निभानी पड़ती है दोहरी जिम्मेदारी

इजलास में मौजूद कैप्टन सय्यदा सलवा फातिमा, फर्स्ट आॅफीसर (को पायलट), इंडेगो रिलाइंस ने ''अपनी कहानी, अपनी जबानी'' अनवान के तहत कहा कि खवातीन को जद्द-ओ-जहद ज्यादा करनी पड़ती है लेकिन मेहनत-ओ-लगन से हम मंजिल-ए-मक़्सूद पर पहुंच जाते हैं। प्रोफेसर फरीदा सिद्दीकी, डीन स्कूल आफ आर्टस एंड सोश्यल साइंसिस ने लेबर मार्किट में सनफी इमतियाज पर पावर प्वाईंट प्रजेंटेशन पेश किया। तकरीब को प्रोफेसर शाहिदा, डायरेक्टर मर्कज मुतालआत निसवां और डाक्टर आमना तहसीन, सदर शोबा तालीम-ए-निस्वाँ-ओ-कोआडीर्नेटर यौम खवातीन तकारीब ने भी खिताब किया। प्रोग्राम का आगाज तिलावते कलाम पाक से हुआ। डाक्टर शबाना कैसर, अस्सिटैंट प्रोफेसर ने कार्रवाई चलाई। सिंपोजियम के बाद ड्रामा कलब के जेरे एहतिमाम बैन-उल-अकवामी खवातीन के सिलसिले में मानो ड्रामा कलब की जानिब से ड्रामा 'औरत के सफर-ए-हयात की कहानी' और मोनो एक्ट ''जहेज औरत के समाजी व सकाफती इस्तिहसाल की अलामत' भी पेश किया गया। जनाब मेराज अहमद, कल्चरल कोआर्डीनेटर ने इंतिजामात किए। ड्रामा में खवातीन पर सदियों से किए जा रहे जुलम-ओ-ज्यादती को उजागर किया गया। और कहा गया कि औरत आज भी अपने वजूद की जंग लड़ रही हैं। औरतों के साथ इमतियाजी सुलूक रहम-ए-मादर से शुरू होता है और कब्र पर खत्म होता है। ड्रामा में आफीया परवीन, अमामा अमन, नाजिया आरजू, मुहम्मद मिनहाज, अबदुर्रहमान, मुहम्मद अरशद तबरेज, मजहर सुबहानी, मुहम्मद रागिब आलिम, सय्यद मजहर उद्दीन, शाहनवाज आलिम, शम्स तबरेज ने काम किया। ड्रामा के डायरेक्टर डाक्टर अदनान बिसमिल्लाह, मुआविन डायरेक्टर मुहम्मद नदीम, प्रोडक्शन मुहम्मद जमीर हसन और मुहम्मद नूर-ऐन, लाइट्स नूर-ए-मुजस्सम और अबदुल कादिर के थे। हुसना परवीन  ने 'जहेज औरत के समाजी व सकाफती इस्तिहसाल की अलामत' के जेरे उनवान मोनो एक्ट पेश किया। ड्रामा और मोनो एक्ट को नाजरीन ने काफी पसंद किया।


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