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अमुसलमान अब दीनी तालीमी इदारों के कयाम की तरफ तवज्जों दें

 मुस्लमानों की तालीमी पसमांदगी, हकायक और तदारुक पर उल्मा ने किया खिताब
अमीर शरीयत का तालीमी व फलाही मशगूलतरीन मधूबनी दौरा 


पटना :
इमारत शरयह बिहार, उड़ीसा व झारखंड ना सिर्फ तीन रियास्तों के मुस्लमानों बल्कि पूरे मुल्क के मुस्लमानों का एक कदीम और मजबूत तरीन इदारा है, जिसका माजी रोशन हाल, ताबनाक और मुस्तकबिल रोशन पुर उम्मीद है, ये इदारा सौ सालों से लगातार मुल्क व मिल्लत के लिए गिरां कदर खिदमात अंजाम दे रहा है, ये बातें इमारत शरयह के काइम मकाम नाजिम मौलाना मुहम्मद शिबली अल कासिमी ने पे्रस के लिए जारी एक बयान में कहीं। 

उन्होंने कहा कि इस वक़्त इमारत शरयह के अमीर शरीयत मुस्लमानों में तालीमी बेदारी की मुसलसल तहरीक चला रहे हैं, अमीरे शरीयत की ख्वाहिश मुस्लमानों को दीनी तालीम के साथ साईंस, टेक्नालोजी और दीगर जदीद उलूम व फनून के मैदान में आगे देखने का है। उन्होंने कहा कि मुसलमान दीनी तालीम के मकातिब, स्कूल, कॉलेज, टेक्नीकल की तालीम के इदारे और हॉस्टल के कियाम की तरफ तवज्जो दें, और कौम व मिल्लत की सच्ची खिदमत अंजाम दें। हजरत अमीर शरीयत की हिदायत पर लगातार मकातिब कायम हो रहे हैं, स्कूली तालीम के इदारे खोले जा रहे हैं। मुख़्तलिफ मुकामात पर दारुल कजा कायम किए जा रहे हैं।

  1. तालीमी पसमांदगी-शैक्षणिक पिछड़ापन
  2. हकायक -वस्तुस्थिति, तथ्य 
  3. तदारुक-उपाय 
  4. गिरां कदर- कीमती
  5. तहरीक-मुहिम, आंदोलन, गति

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