उर्दू यूनीवर्सिटी में राक वाक का इनइकाद
मर्कज मुतालआत दक्कन और सेव राक सोसाइटी की मसाई
नई दिल्ली : मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी, हारून खान शेरवानी मर्कज बराए मुतालाते दक्कन और सोसाइटी टू सेव रॉक्स, हैदराबाद के इश्तिराक से यूनीवर्सिटी में राक वाक का एहतिमाम किया गया। इसका मकसद कैम्पस में मौजूद कुदरती चटानों को एक विरसा के तौर पर महफूज रखने तलबा में शऊर बेदार करना था। ये चट्टानें छोटे तालाबों, पेड़ पौधों, फूलों और परिंदों का मस्कन भी हैं, जिनका तहफ़्फुज जरूरी है। प्रोफेसर फातिमा अली खान, सदर सोसाइटी, मुहतरमा के कादिर और सोसाइटी के दीगर अराकीन ने तलबा से खिताब करते हुए कहा कि इस वाक का मकसद सतह मुर्तफे दक्कन की कदीम-ओ-मुनफरद ग्रेनाइट चटानों की देख-भाल और तहफ़्फुज के मुताल्लिक शऊर बेदारी है। प्रोफेसर सय्यद ऐनुल हसन, वाइस चांसलर ने इस तरह की सरगर्मियों को तलबा के लिए मुफीद करार दिया।
वाक के बाद अर्जीयाती तनव्वो (भू-वैज्ञानिक विविधता) पर प्रोफेसर एसी नारायण, शोबा जियोलाजी, यूनीवर्सिटी हैदराबाद; मुहतरमा कबीता दास कोली, प्रोफेसर प्रवीण सक्सेना ने तलबा से खिताब किया। प्रोफेसर सलमा अहमद फारूकी, डायरेक्टर मर्कज और डाक्टर ए सुभाष, अस्सिटेंट प्रोफेसर मर्कज ने इंतिजामात किए। उर्दू यूनीवर्सिटी तलबा की बड़ी तादाद के अलावा कुदरती माहौल के तहफ़्फुज से दिलचस्पी रखने वाले अहले जौक खवातीन-ओ-हजरात ने राक वाक और वर्कशॉप में शिरकत की
