Top News

तालीम के जरीये ही तरक़्की के मनाजिल तय हो सकते हैं : अमीर शरीयत


कटक में इमारत पब्लिक स्कूल का इफ़्तिताह, अमीर शरीयत और नायब अमीर शरीयत का बसीरत अफरोज खिताब

कटक : इस मिल्लत की शानोशौकत और अजमत की इमारत तालीम की बुनियादों पर कायम है। अल्लाह ताअला ने पैगंबर के जरीये पूरी मिल्लत को पहला पैगाम जो दिया, वो इल्म का है। इल्म ही वो शय है, जिसने औलाद-ए-आदम को तमाम मखलूकात के ऊपर फजीलत बखशी। जब तक मिल्लत ने तालीम को अपने सीने से लगाए रखा, अजमत-ओ-बुलंदियों के मनाजिल सर करते चले गए। एक वक़्त था, जब आलमे इस्लाम के उलूम-ओ-फनून की रोशनी से पूरा आलिम रोशन हो रहा था और मशरिक वुसता से लेकर यूरोप तक इस्लामी उलूम व फनून की खोशाचीनी कर रहा था। लेकिन अफसोस कि मुस्लमानों ने अपनी अजमत-ओ-शौकत को खो दिया और अपनी तर्जीहात की बुनियादें इल्म के अलावा दूसरी चीजों पर कायम कर दी, नतीजा ये हुआ कि उनकी शान-ओ-शौकत और अजमत किस्सा बनकर रह गई। ये बातें अमीर शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने 21 मार्च को दारुल कजा, बखशी बाजार कटक में इमारत पब्लिक स्कूल के इफ़्तिताह के मौके पर मुनाकिद एक इफ़्तिताही तकरीब से खिताब करते हुए कहीं। 

तालीम के खित्ते में सबसे पिछड़ी कौम

उन्होंने कहा कि मुसलकानों की लापरवाही के सबब नौबत यहां तक आन पहुंची कि हुकूमतों को उनके पिछड़ेपन के अस्बाब की जुस्तजू हुई। माजी में हकूमते हिन्द ने एक साबिक जज जस्टिस राजिंदर सच्चर की कयादत में हिन्दुस्तानी मुस्लमानों की तालीमी पसमांदगी के अस्बाब जानने के लिए एक सर्वे कमेटी बनाई। कमेटी के आदाद-ओ-शुमार चौंका देने वाले थे। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लमानों की शरह खवांदगी (साक्षरता दर) मुल्क में तमाम मजाहिब के मुकाबला में सबसे कम, आला तालीम में उनकी शरह ढाई फीसद, नौकरियों में सिफर इशारीया चार एक फीसद और मआशी-ओ-समाजी हालत दलितों से भी अबतर बताई गई है। उन्होंने कहा, जिस कौम के 57 फीसद लोग इल्म को अपनी तर्जीहात में शामिल नहीं करेंगे, वो कौम समाजी और मआशी एतबार से कैसे मुस्तहकम हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इमारत पब्लिक स्कूल के कयाम से इमारत शरयह मिल्लत को यही पैगाम दे रही है कि अपनी तजीर्हात को बदलें और जिस इल्म की बुनियाद पर आपको खड़ा किया गया था, उसे एक बार फिर अपने सीने से लगाएं। इमारत पब्लिक स्कूल के कयाम का मकसद है कि कौम के बच्चे अपनी शनाख़्त और तहजीब व तशखीस (पहचान) के साथ समाज के लिए मुफीद से मुफीदतर बनें। 

हजरत मौलाना मुहम्मद शमशाद रहमानी कासिमी, नायब अमीर शरीयत बिहार, उड़ीसा व झारखंड ने भी इल्म नाफे की फजीलत व अहमीयत बयान की। उन्होंने कहा कि कुरआन ने कहा कि इल्म वाले और बे इल्म कभी बराबर नहीं हो सकते। तालीम याफता अफराद ही मजबूत-ओ-मुस्तहकम समाज की तशकील कर सकते हैं। इमारत शरयह हर जगह इमारत पब्लिक स्कूल इसलिए कायम कर रही है कि एक मजबूत-ओ-मुस्तहकम समाज की दाग बेल डाली जा सके। उन्होंने कहा कि मिल्लत के नौनिहालों के अंदर इस्लामी फिक्र-ओ-तहजीब कायम रखने और उनकी शनाख़्त-ओ-तशख़्खुस की हिफाजत के लिए जरूरी है कि हम बड़ी तादाद में ऐसे बुनियादी मकातिब, स्कूल, कालेज और दीगर तालीमी इदारे कायम करें, जहां इस्लामी माहौल में अपने दीन-ओ-मजहब, अकीदा-ओ-फिक्र और तहजीब-ओ-शनाख़्त की बका के साथ मयारी तालीम दी जा सके ताकि हमारे बच्चे आला से आला तालीम हासिल करें मगर अपनी हकीकत-ओ-तशख़्खुस को ना भूलें।

इल्म की अहमियत बताई

प्रोग्राम को मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद अंजार आलिम कासिमी, काजी शरीयत मर्कजी दारुल कजा इमारत शरीय फुलवारी शरीफ, पटना ने भी मुखातिब किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम में तालीम की किस दर्जा अहमीयत है, इसका अंदाजा इस वाकिया से लगाया जा सकता है कि गजवा बदर के मौका पर जब कुफ़्फार मक्का के कुछ लोग कैद हो कर मुस्लमानों के हाथ लगे तो आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने उनकी रिहाई की शर्त ये करार दी कि उनमें से हर एक कम से कम मुस्लमानों के दस बच्चों को लिखना पढ़ना सिखा दें। जाहिर सी बात है कि इन कैदियों ने मुस्लमानों के बच्चों को कोई दीन-ओ-मजहब की तालीम नहीं दी होगी बल्कि इस जमाना का मुरव्वजा इल्म और फन ही सिखाया होगा। इससे पता चला कि इस्लाम इल्म के मुआमला में कोई तफरीक नहीं करता और हर उस इल्म की हौसला-अफजाई करता है, जो मुफीद हो और जो इन्सान को दूसरों के लिए नफा बखश बनाए। इस्लाम के नजदीक हर वो इल्म महबूब है, जो इन्सान को अपने खालिक और अपनी जात की मार्फत कराए लेकिन जो इल्म इन्सान को अपने खालिक से दूर कर दे, उस इल्म की हौसला-अफजाई इस्लाम नहीं करता। मजलिस को मौलाना अब्बू दाउद, मुहतमिम मुदर्रिसा खुदैजा अलकुबरा ने भी खिताब किया। इस मौके पर कटक के मशहूर नौउम्र नात ख्वा हमजा गाजी ने अपनी मुतरन्निम आवाज में नाअतिया कलाम पेश किया और हजरत अमीर शरीयत की मदह में भी कुछ अशआर सुनाए। इससे कब्ल मुकामी उल्मा-ओ-दानिश्वरान ने हजरत अमीर शरीयत और दीगर मेहमानों का इस्तिकबाल किया। इनमें मौलाना मीर मसऊद अली, मौलाना सय्यद अब्दुल हफीज कासिमी, मौलाना मुफ़्ती अबदुर्रहमान, मौलाना सुलतान नदवी, हाफिज अब्बू नसीम, सय्यद बरकत अली,  हाजी अब्दुल कुद्दूस, मौलाना खैर उद्दीन वगैरह शामिल हैं। 


Post a Comment

if you have any suggetion, please write me

और नया पुराने