बंगलूरू: कुछ शरपसंद अनासिर हिजाब पर हंगामा कर रहे हैं जबकि मुल्क का आईन हर शहरी को अपने मजहब, लिबास, मजहबी शनाख़्त की आजादी का हक देता है। कर्नाटक के शहर में हिजाब तनाजा को लेकर मुआमला जोर पकड़ता जा रहा है। फिर्कापरस्त अनासिर के दबाव में उडपी के कुछ कॉलिजों ने मुस्लिम तालिबात को क्लास में हिजाब पहनने पर पाबंदी लगा दी है, जिसके खिलाफ कांग्रेस एमएलए कनीज फातिमा और उनके हामियों ने एहतिजाज शुरू कर दिया है। इससे पहले राहुल गांधी ने भी इस मुआमले पर खुलकर हमला किया है। पिछले महीने, उडपी के गर्वनमेंट यूनीवर्सिटी कॉलेज ने पाँच लड़कीयों को हिजाब पहन कर क्लास में जाने से रोक दिया है। इन लड़कियों की तरफ से कर्नाटक हाईकोर्ट में एक अर्ज़ी दाखिल की गई है। कांग्रेस एमएलए कनीज फातिमा और उनके हामियों ने हिजाब पहनने पर पाबंदी की सख़्त मुखालिफत की है। फातिमा और उनके हामियों ने कलबर्गी में डीसी आॅफिस के बाहर सड़कों पर खड़े हो कर इस फैसले के खिलाफ शदीद एहतिजाज किया। एहतिजाज के दौरान कनीज फातिमा ने कहा कि लड़कियों को हिरासाँ किया जा रहा है। तमाम जातों और मजाहिब के लोग यहां जमा हुए हैं क्योंकि उन्हें इमतिहान से दो माह कबल कॉलेज में दाखिल होने से रोका जा रहा है। कांग्रेस एमएलए कनीज ने कहा कि हम यूनीफार्म के मुताबिक हिजाब का रंग तबदील करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम उसे पहनना बंद नहीं करेंगे। इन्होंने कहा कि वे असेंबली में भी हिजाब पहनती हूँ। वजीरे आला को मैमोरंडम दिया जाएगा और इसके बाद हम उडपी में एहतिजाज करेंगे।
000
हिजाब के इस्तेमाल से रोकना शख़्सी आजादी के मतरादफ
मौलाना खालिद सैफ-उल्लाह रहमानी जनरल सेक्रेटरी आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला का बयां
नई दिल्ली: आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के जनरल सेके्रटरी हजरत मौलाना खालिद सैफ-उल्लाह रहमानी ने कर्नाटक में मुस्लिम तालिबात को हिजाब से रोकने के पस मंजर में कहा है कि कर्नाटक जुनूब की एक अहम रियासत है और मजहबी हम आहंगी उसकी पहचान है, लेकिन अफसोस कि यहां भी कौमी इत्तिहाद को पारापारा करने की कोशिश की जा रही है, उडपी और कर्नाटक के कुछ दूसरे इलाकों के बाअज स्कूलों में मुस्लिम तालिबात को हिजाब से रोकना ऐसी ही साजिÞशों का हिस्सा है, आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड उसकी सख़्त मुजम्मत करता है, लिबास का ताल्लुक जाती पसंद से है और ये मसला शख़्सी आजादी के दायरा में है, इसलिए इसे मौजू बनाकर समाज में इखतिलाफ पैदा करना मुनासिब नहीं है, हर तबका को इसकी आजादी होनी चाहिए कि वो अपनी पसंद का लिबास इखतियार करे, हिन्दोस्तान में सेक्यूलारिज्म का मतलब ये नहीं है कि कोई फर्द या गिरोह अपनी मजहबी पहचान को जाहिर नहीं करे, हाँ ये बात जरूर सेक्यूलारिज्म में दाखिल है कि हुकूमत किसी खास मजहब की पहचान को तमाम शहरियों पर उसकी मर्ज़ी के बगैर मुसल्लत न करे, इसलिए हुकूमत कर्नाटक को चाहिए कि वो सरकारी स्कूलों में ना किसी खास लिबास के पहनने का हुक्म दे और ना किसी गिरोह को उसकी पसंद का लिबास पहनने से मना करे।
000