जन्नती दरवाजा हुआ बंद। बड़े पीर की पहाड़ी से दी गई तोपों की सलामी
दरगाह में गूंजी या मोईन, हक़ मोईन की सदाएं
कुल की महफिल के साथ ही सुराही में गुलाब जल और केवड़े का पानी छिड़का गया। हर कोई कुल के छींटे पाने की हसरत में नजर आया। दरगाह शरीफ में देर रात से धुलाई का सिलसिला शुरू हो गया था जिससे दरगाह के अहाते में एक रूहानी फिजा फैली हुई महसूस हुई।
बडे पीर की पहाडी से दी गई तोपों की सलामी:
कुल की महफिल के साथ ही दरगाह शरीफ के कदीमी रस्मों को मौरूसी अमले की जानिब से पूरा किया गया। जहां बड़े पीर की पहाड़ी से तोपों की सलामी दी गई वहीं नक्कारखाने से शादियाने बजाए गए।
जन्नती दरवाजा हुआ बंद:
कुल की महफिल खत्म होने के साथ ही सज्जादानशीन दरगाह ख्वाजा साहब आस्ताना शरीफ में हाजिरी के लिए पहुंचे। इसी के साथ ही जन्नती दरवाजा बंद किया गया।
पूरी हुई दागौल की रस्म:
सज्जादानशीन साहब के आस्ताना शरीफ में जाने के साथ ही तारीखी छतरी गेट से मलंग और कलंदर हजरात के महफिल खाने पहुंच कर दागोल की रस्म अदा की गई।
बदला खिदमत का वक्त:
कुल की महफिल के साथ ही आस्ताना शरीफ में खिदमत का वक्त पहले की तरह हो जाएगा। अब रोजाना जोहर की नमाज के बाद आस्ताना शरीफ की खिदमत की जाएगी।
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