इन नकूश का ताअल्लुक पहली इस्लामी सदी हिजरी से बताया जाता है
चटानों पर अरबी के अशआर, कुरानी आयात, हिक्मत की बातें, मस्नून दुआएं और शख्सियात के नाम लिखे हुए हैं।
महकमा आसारे कदीमा यहां 199 तारीखी मुकामात का इंदिराज कर चुका है
रियाद: सऊदी अरब में नजरान का इलाका आसारे-ए-कदीमा से माला-माल है। यहां चटानों पर नुकूश इस्लामी तमद्दुन और कदीम इन्सानी तहजीब के आसार साफ देखे जा सकते हैं। सरकारी खबररसां एजेंसी एसपीए के मुताबिक नजरान के एलिजरवा, अलदरीब, कर्न अलजाफरान और एल्मर पहाड़ों में मुख़्तलिफ जानवरों और अश्या की शक्लें नक्श हैं। बताया जाता है कि इन नकूश का ताल्लुक पहली इस्लामी सदी हिज्री से है। चटानों पर अरबी के अशआर, कुरानी आयात, हिक्मत की बातें, मस्नून दुआएं और शख्सियात के नाम लिखे हुए हैं। इसके अलावा अजीं अलमसंद, अलंबती और अलकूफी रस्मुल खत में नक़्श-ओ-निगार भी बने हैं जो इस बात का सबूत हैं कि इस्लाम से 300 साल कब्ल ये इलाका अजीम तारीखी और तमद्दुनी सरगर्मियों का मर्कज रहा था। एलिजरवा पहाड़ सकाम जंगल के जुनूब में है। यहां चटानों पर जो नुकूश मिलते हैं, उनका ताअल्लुक इस्लाम के इब्तिदाई अह्द से है। ये नकूश बड़े करीने से चटानों पर तराशे हुए हैं। उनकी जबान इस दौर के इन्सानों की जिंदगी और उनकी सरगर्मियां बयान करती और उस दौर के इन्सानों के तमद्दुनी इर्तिका का पता देते हैं। वादी नजरान के जुनूब मशरिक में अल जाफरान का इलाका अहम तारीखी अहमीयत का हामिल है। ये अलाखदोद तारीखी शहर के जमाने से ताल्लुक रखने वाली चटानों से आबाद है। यहां चटानों से बने तारीखी मुकाम की बुनियादें भी दरयाफत हुई हैं। मुम्किन है कि उनका ताल्लुक अलाखदोद तारीखी शहर के तामीराती दौर से हो। महकमा आसारे कदीमा यहां 199 तारीखी मुकामात का इंदिराज कर चुका है। जबकि दरयाफतों का सिलसिला अब भी जारी है। नजरान का महल स्ट्रैटेजिक नौईयत का है और मुख़्तलिफ तहजीब-ओ-तमद्दुन रखने वाले ममालिक के दरमयान जजीरा अरब में कबाइल का मर्कज रहा है।
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