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पार्सी मआशरे ने मनाया नया साल '' नौरोज '' तीन हजार साल से ज्यादा पुरानी है तारीख

रमजान उल मुबारक-1445 हिजरी

विसाल (11 रमज़ान)
हज़रत ख्वाजा सय्यद मिस्बाहुल हसन अलैहिर्रहमा,फफूंद शरीफ

शब-ए-कद्र

'' हजरत आयशा रदि अल्लाहु अन्हु ने फरमाया -या रसूल अल्लाह ﷺ अगर मुझे शब-ए-कद्र मिल जाए तो क्या दुआ करु। तो आप ﷺ ने फरमाया -अल्लाहुम्मा इन्ना-क अफुवन तुहिब्बुल अफवा फा-अ-फो अन्नी। पढ़ा करो। ''
(तर्जुमा- या अल्लाह तू माफ करने वाला है और माफ करने को पसंद करता है इसलिए मुझे माफ फरमा)
- सुनन इब्ने माजा

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पार्सी मआशरे ने मनाया नया साल ह्यनौरोजह्ण, तीन हजार साल से ज्यादा पुरानी है तारीख
-  image google

✅ नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया 
गुजिश्ता दिनों पार्सी मआशरे ने अपना नया साल नौरोज़ मनाया। पार्सी इसे जश्न की तरह मनाते हैं। ये पार्सी बिरादरी के लिए ईमान की अलामत है। ये दो फ़ारसी अलफ़ाज़ नौ और रोज़ का मुरक्कब है। नौ का मतलब नया और रोज़ का मतलब है दिन। यानी नया दिन (या साल)। पार्सी नया साल मनाने की तारीख़ 3000 साल से ज़्यादा पुरानी है। नौरोज़ ईरानी नया साल है, जो मुख़्तलिफ़ ममालिक में मुख़्तलिफ़ औक़ात में मनाया जाता है। 
    अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में नौरोज़ को बैन-उल-अक़वामी तातील (अंतरराष्ट्रीय अवकाश) के तौर पर तस्लीम किया गया है। पार्सी लोग इस दिन अपने घरों की सफ़ाई करते हैं। वो नए कपड़े पहन कर अपनी इबादत-गाह यानी आग के मंदिर जाते हैं  उसके बाद वो अपने ख़ुदा यानी ह्य यज़्दाँ' का शुक्र अदा करते हैं। वो उन्हें दूध, संदल, फल, फूल वग़ैरा चढ़ाते हैं और उससे मन्नतें मांगते हैं। इसके अलावा घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। ग़रीबों को अतीया करने के साथ-साथ मेहमानों को भी अपने घर बुलाते हैं। 
    नौरोज़ फ़ारस के बादशाह जमशेद की याद में मनाया जाता है। शाह जमशेद ही थे, जिन्होंने पार्सी कैलेंडर बनाया और शमसी हिसाब का आग़ाज़ किया। पार्सी लोग उस दिन एक-दूसरे को नए साल की मुबारकबाद देते हैं। पार्सी बिरादरी के लोग सबसे ज़्यादा ईरान, इराक़, अफ़्ग़ानिस्तान, तुर्की, शाम वग़ैरा में मौजूद हैं। इसके अलावा ये ख़ानदान मशरिक़ वुसता (मध्य-पूर्व), जुनूबी (दक्षिण) क़फ़क़ाज़, काला सागर के तट और शुमाली (उत्तर), मग़रिबी (पश्चिम), वसती (मध्य) और जुनूबी (दक्षिण) एशिया में मौजूद हैं जहां इस तेहवार को ख़ुशी का तहवार के तौर पर मनाया जाता है। हिन्दोस्तान में भी पार्सी बिरादरी के लोगों की बड़ी तादाद है। बहुत सी सक़ाफ़्तों (संस्कृति) में नौरोज़ एक नए साल के आग़ाज़ की भी निशानदेही करता है। ख़्याल रहे कि फार्सियों को ही पारसी कहा गया है। इस मज़हब की इबतिदा ईरान से हुई है। 

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