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गैर मंजूरशुदा का मतलब गै़र कानूनी नहीं : मुफ़्ती अबुल कासिम

 

गैर मंजूरशुदा का मतलब गै़र कानूनी नहीं : मुफ़्ती अबुल कासिम
File Photo

देवबंद : आईएनएस, इंडिया 

यूपी में मदारिस का सर्वे मुकम्मल हो चुका है, इस सिलसिले में दार-उल-उलूम देवबंद के ताल्लुक से ये खबर हिन्दी मीडीया में चलाई गई थी कि इसका मुदर्रिसा मंजूरशुदा नहीं है, हिन्दी मीडीया के नाम निहाद रिपोर्टों ने इसको गै़रकानूनी बनाकर पेश किया, जबकि इसके लिए लफ़्ज गैर मंजूरशुदा रिवाज में है, अहम बात ये है कि किसी भी मुदर्रिसा के लिए मंजूरशुदा होने की कोई शर्त नहीं। इस सिलसिले में दार-उल-उलूम देवबंद ने कहा कि मदारिस इस्लामिया के सर्वे के सिलसिले में रिपोर्ट शाइआ करते वक़्त कौमी और मुकामी जराइआ इबलाग (मीडिया) को अपना संजीदा और जिम्मेदाराना फरीजा अदा करना चाहिए। गैर जिम्मेदाराना और गलत मालूमात पर मबनी रिपोर्टिंग से मदारिस के किरदार पर कोई फर्क़ पड़े ना पड़े, लेकिन मीडीया की शबिया (छवि, इमेज) दुनिया में जरूर खराब होती है। 

दरअसल यूपी में मदारिस का सर्वे खत्म हो चुका है जिसके बाद दार-उल-उलूम देवबंद के ताअल्लुक से यह खबर चलाई जा रही है कि यह मदरसा हुकूमत से मंजूरशुदा नहीं है। दार-उल-उलूम देवबंद के मुहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नामानी ने इस किस्म की बे-बुनियाद खबरों की मुजम्मत की और कहा है कि हमारे मदारिस का किसी सरकारी बोर्ड से अल्हाक (संबंध) नहीं है, लेकिन उनको गै़रकानूनी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने मजीद कहा कि हमारे तमाम मदारिस दस्तूर हिंद में दी गई मजहबी आजादी के मुताबिक कायम है।


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