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इक्कीसवीं सदी में मजहब के नाम पर हम कहां पहुंच गए : सुप्रीम कोर्ट

इक्कीसवीं सदी में मजहब के नाम पर हम कहां पहुंच गए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया 

नफरतअंगेज तकारीर पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हुक्म में कहा कि इस अदालत की जिÞम्मेदारी है कि वो ऐसे मुआमलात में मुदाखिलत करे। 

नफरतअंगेज तकारीर पर सुप्रीमकोर्ट ने हुकूमतों से कहा कि या तो कार्रवाई करें, वर्ना तौहीन के लिए तैयार रहें। सुप्रीमकोर्ट ने दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड की पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा कि नफरतअंगेज तकारीर में मुलव्वस (शामिल) अफराद के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, अकवाम-ए-मुत्तहिदा (संयुक्त राष्टÑ) के सेक्रेटरी जनरल अन्तोनियो ग्वीटरस की तरफ से हिन्दोस्तान के तीन रोजा दौरे के दौरान इन्सानी हुकूक के रिकार्ड और बढ़ती नफरतअंगेज तकारीर पर हिन्दोस्तान पर तन्कीद के दो दिन बाद, सुप्रीमकोर्ट ने जुमा 21 अक्तूबर को नफरतअंगेज तकारीर पर संजीदगी से तबसरा किया। 

सुप्रीमकोर्ट ने अपने रिमार्कस में कहा कि ये 21वीं सदी है, मजहब के नाम पर हम कहां पहुंच गए हैं। नफरतअंगेज तकारीर पर दायर दरखास्त की समाअत करते हुए अदालत ने हुक्काम को हिदायत की कि वो ऐसे मुआमलात के खिलाफ खुद कार्रवाई करें या तौहीन के इल्जामात का सामना करें। अदालत ने कहा कि अगर आफिसरान काम करने में नाकाम रहे तो तौहीन-ए-अदालत मामले में कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीमकोर्ट ने जुमेरात को मर्कज और रियास्तों से एक अर्जी पर जवाब तलब किया जिसमें मुस्लिम कम्यूनिटी के खिलाफ नफरतअंगेज तकारीर को रोकने के लिए मुनासिब इकदामात करने की हिदायत की दरखास्त की गई थी। जस्टिस अजय रस्तोगी और सीटी रवी कुमार की बेंच ने मर्कज और तमाम रियास्तों को नोटिस जारी करते हुए उसे दूसरी बेंच के सामने जेरे इलतिवा (लंबित) इसी तरह की दरखास्तों से मुंसलिक किया। 

अर्ज गुजार शाहीन अब्दुल्लाह ने सुप्रीमकोर्ट से रुजू किया है जिसमें मर्कजी और रियास्ती हुकूमतों को मुल्कभर में नफरतअंगेज जराइम और इश्तिआल अंगेज तकारीर के वाकियात की आजादाना, मोतबर और गैर जांबदाराना तहकीकात शुरू करने की हिदायत की दरखास्त की है। सीनीयर वकील कपिल सिब्बल, दरखास्त गुजार की तरफ से पेश हुए। इबतिदाई तौर पर दलील दी कि इस मसले से निमटने के लिए कुछ करने की जरूरत है। उनका मजीद कहना था कि नफरतअंगेज तकारीर करने या ऐसे जराइम में मुलव्वस होने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बेंच ने कहा कि दरखास्त में की गई दरखास्त बहुत मुबहम (अस्पष्ट) है और इसमें किसी खास मिसाल का जिÞक्र नहीं किया गया है। अदालत ने कहा कि जहां किसी मुआमला में एफआईआर दर्ज की गई हो, वहां नोटिस लिया जा सकता है। ताहम कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अर्ज़ी में की गई दरखास्त मुबहम नहीं है। इसके साथ उन्होंने हाल ही में दी गई कुछ नफरतअंगेज तकारीर का भी जिÞक्र किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के जराइम को रोकने के लिए गुजिश्ता छ: माह में कई दरखास्तें दायर की गई हैं लेकिन इस तरह के वाकियात अब भी जारी हैं। अपनी दरखास्त में अब्दुल्लाह ने नफरतअंगेज तकारीर को रोकने के लिए गै़रकानूनी सरगर्मियों की रोकथाम कानून और दीगर सख़्त दफआत के नफाज (लागू करने) का भी मुतालिबा किया है।


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